जिया हक | केंद्र सरकार ने इस साल 286 लाख टन धान की खरीद की है, जोकि पिछले साल से 18.6 फीसदी अधिक है। 17 नवंबर तक प्राप्त डेटा के मुताबिक इसमें करीब 70 पर्सेंट हिस्सेदारी पंजाब की है। सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य के रूप में करीब 27 लाख किसानों को 54147 करोड़ रुपए दे चुकी है। इनमें से अधिकतर किसान चावल उपजाने वाले अहम राज्य पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, उत्तराखंड, तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश से हैं।
अकेले पंजाब में 196 लाख टन धान की खरीद हुई है, जोकि कुल खरीद का 69.7 फीसदी है। पिछले साल 17 नवंबर तक सरकार ने 241 टन धान की खरीद की थी। माना जा रहा है कि इस साल खरीफ फसल का रिकॉर्ड उत्पादन होगा। इसके 1445 लाख टन रहने की उम्मीद है, जोकि पिछले साल से अधिक है। 2019-20 खरीफ सीजन में 1434 लाख टन उत्पादन हुआ था। अधिक खरीद के पीछे बेहतर उत्पादन और अच्छे मॉनसून को वजह माना जा रहा है।
केंद्र सरकार कृषि सेक्टर में सुधारों को लेकर लाए गए तीन कानूनों के विरोध में हो रहे विरोध प्रदर्शनों और राजनीति को कुंद करने के लिए भी रिकॉर्ड मात्रा में खरीदारी कर रही है। कानून का विरोध करने वाले किसानों को यह आशंका है कि सुधारों से उनकी सौदेबाजी की शक्ति नष्ट हो जाएगी और खरीद प्रणाली ध्वस्त हो जाएगी, जिसके तहत सरकार निर्धारित कीमत पर उनसे कृषि उपज खरीदती है।
खाद्य मंत्रालय के अधिकारियों का अनुमान है कि सरकार की ओर से 2020-21 में ग्रीष्मकालीन धान की खरीद 742 लाख टन तक जा सकती है, जोकि 2019-20 में हुई 627 लाख टन खरीद से 18 फीसदी अधिक है।
कमोडिटी ट्रेडिंग करने वाली कंपनी कॉमट्रेड के अभिषेक अग्रवाल के मुताबिक, सरकार गरीबों को खाद्य अनुदान के रूप में अधिक अनाज नहीं देती है तो अधिक खरीद की वजह से इनका प्रबंधन मुश्किल होगा। अप्रैल से नवंबर 2020 के बीच सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत गरीबों को मुफ्त राशन दिया है।