हिंडाल्को ने सिलवासा में एल्युमिनियम निकालने के नए प्लांट को दिखाई हरि झंडी

हिंडाल्को ने सिलवासा में एल्युमिनियम निकालने के नए प्लांट को दिखाई हरि झंडी

इन्दौर/मुम्बई । आदित्य बिरला समूह की मैटल फ्लैगशिप, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड ने सिलवासा में 34,000 टन के एल्युमिनियम निकालने के प्लांट की शुरुआत करने की योजना की उद्घोषणा की। यह नया प्लांट, पश्चिमी और दक्षिणी क्षेत्र में उत्सारित (प्रेशर के साथ निकाले गए) एल्युमिनियम से बने उत्पादों के लिए तेजी से बढ़ते बाज़ार को सेवाएं देगा।
चूंकि हिंडाल्को कम्पनी अपनी लंबी अवधि के डाउनस्ट्रीम निवेश योजना की समीक्षा कर रही है, ऐसे में सिलवासा में यह 730 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट हिंडाल्को की डाउनस्ट्रीम स्ट्रेटजी की दिशा में उठाये गए एक बड़े कदम का सूचक है। कम्पनी का उद्देश्य आने वाले कुछ सालों में एक बड़ा वैल्यू एडेड उत्पाद पोर्टफोलियो बनाने का है। यह निवेश आर्थिक बहाली की दिशा में आत्मविश्वास का इशारा करता है, जो कि डाउनस्ट्रीम वेल्यू एडेड उत्पादों के लिए मांग में बढ़ोत्तरी करेगा।
श्री सतीश पाई, मैनेजिंग डायरेक्टर, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज़ के अनुसार-‘हम, बिल्डिंग और कंस्ट्रक्शन के साथ ही ऑटोमेटिव सेक्टर्स में बढ़ती मांग के साथ आर्थिक स्थिति को फिर से बहाली होते हुए देख रहे हैं। इसने ही हमें कदम आगे बढाने का आत्मविश्वास दिया है। सिलवासा में शुरू होने वाला प्लांट, उच्च गुणवत्ता वाले एल्युमिनियम उत्पादों के साथ हमें ग्राहकों को और तेज, सेवाएं देने में सक्षम बनाएगा।’
सिलवासा का यह अत्याधुनिक प्लांट भारत भर में अपनी तरह का पहला प्लांट होगा। इस फुली ऑटोमैटेड प्लांट में तीन एक्स्ट्रूज़न प्रेसेस (दबाव के साथ एल्युमिनियम निकालने की प्रक्रिया) शामिल हैं और यह हिंडाल्को को अपने बिल्डिंग और कन्स्ट्रक्शन, ऑटो और ट्रांसपोर्ट, इलेक्ट्रिकल, कंज्यूमर तथा इंडस्ट्रियल गुड्स सेक्टर्स से सम्बंधित प्रीमियम ग्राहकों को सेवाएं देने में और सक्षम बनाएगा। उल्लेखनीय है कि एल्युमिनियम इन सभी सेक्टर्स में एक प्रमुख सस्टेनेबल मैटल के रूप में तेजी से जगह बना रहा है क्योंकि यह असीमित तौर पर रीसायकल किया जा सकता है तथा उद्योगों को उनके संचालन में इकोनॉमी मॉडल्स के सर्क्युलर को एकीकृत बनाये रखने में सक्षम करता है।
भारत में एल्युमिनियम एक्स्ट्रूज़न के बाज़ार के तेजी से और बढ़ने की पूरी संभावना है। सम्भावना यह है कि वर्ष 2030 तक यह वर्तमान के करीब 373,000 टन के स्तर से 850,000 टन के स्तर तक पहुंच जाएगा। गौरतलब है कि घरेलू बाजार के पश्चिमी और दक्षिणी क्षेत्र एक्स्ट्रूज़न मार्केट के 60 प्रतिशत से भी अधिक के लिए उत्तरदायी हैं। सिलवासा प्लांट की सुविधा, हिंडाल्को को इस क्षेत्र के ग्राहकों को भी सर्वोत्तम गुणवत्ता, त्वरित सेवाएं और कम समय में सुविधाएं प्रदान करने में सहायता करेगा।
श्री पाई ने आगे कहा-‘पिछले कुछ सालों में, हमारी डाउनस्ट्रीम स्ट्रेटजी के हिस्से के रूप में हमारा उद्देश्य, 7,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ अपनी क्षमता को वर्तमान की 300,000 टन की क्षमता से 600,000 टन तक बढाने का है। डाउनस्ट्रीम असेस्ट्स पर पर हमारा फोकस, हमारे सस्टेनेबल बिजनेज मॉडल का ही हिस्सा है, इसमें आगे एलएमई (लंदन मैटल एक्सचेंज) की अस्थिरता से हमारे व्यवसाय को खतरे से बाहर रखने पर भी जोर दिया गया है।’
हिंडाल्को के वर्तमान एक्स्ट्रूज़न प्लांट्स उत्तर प्रदेश के रेनुकोट तथा केरल के अलुपुरम में स्थित हैं जो मुख्यतः ऑटो, डिफेंस, एरोस्पेस तथा इंडस्ट्रियल सेगमेंट को सेवाएं देते हैं। सिलवासा की नई फैसिलिटी बी एंड सी सेगमेंट पर ध्यान केंद्रित करते हुए, 34,000 टन की अतिरिक्त क्षमता को इसमें शामिल करेगी। इसमें ऑटो, ट्रांसपोर्ट तथा अन्य सेगमेंट के अलावा 60 प्रतिशत से अधिक का एक्स्ट्रूज़न मार्केट शामिल है। इस प्लांट में व्यवसायिक उत्पादन के 24 महीनों में प्रारम्भ होने की संभावना है।
एल्युमिनियम के लाइटवेट होने के बावजूद इसकी मजबूती और एक सस्टेनेबल कच्चे माल के तौर पर इसी असीमित रीसायकल किये जाने की क्षमता को लेकर दुनिया भर में जागरूकता बढ़ने के साथ ही विभिन्न अलग अलग सेक्टर्स में इसको अपनाये जाने को लेकर भी रुझान बढ़ा है।

शेयर करें