महापौर-अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण:

महापौर-अध्यक्ष पद के लिए आरक्षण:

भोपाल, खंडवा महापौर पद ओबीसी महिला, ग्वालियर, देवास, बुरहानपुर, सागर, कटनी सामान्य महिला

भोपाल के रवींद्र भवन में नगर निगमों के महापौर और नगर पालिका व नगर परिषदों के अध्यक्षों के आरक्षण की कार्यवाही शुरु हो गई है।
99 नगर पालिका व 292 नगर परिषदों के अध्यक्ष के लिए आरक्षण प्रक्रिया शुरु

भोपाल में अगला महापौर ओबीसी महिला होगी। खंडवा नगर निगम में भी ओबीसी महिला, जबकि ग्वालियर, देवास, बुरहानपुर, सागर और कटनी में सामान्य महिला महापौर बनेंगी। इंदौर, जबलपुर,रीवा और सिंगरौली महापौर का पद अनारक्षित हो गया है।

भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर सहित प्रदेश के 16 नगर निगमों के महापौर के लिए आरक्षण की कार्यवाही भोपाल के रवींद्र भवन में नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त की मौजूदगी में शुरु हो गई है। इस दौरान 99 नगर पालिका व 292 नगर परिषदों के अध्यक्ष के लिए भी आरक्षण की कार्यवाही भी सम्पन्न होगी। जिसमें राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है।

अजा-जजा के लिए आबादी के अनुसार होता है आरक्षण

नगर निगम में महापौर के लिए अजा, अजजा का आरक्षण आबादी के अनुसार होता है, जबकि ओबीसी आरक्षण 25 प्रतिशत होता है। ओबीसी आरक्षण में नियम यह है कि पिछली बार ओबीसी के लिए आरक्षित रहे निकायों को हटा कर यह आरक्षण होता है। इस बार भी पिछले बार की तरह वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर ही आरक्षण हो रहा है। ऐसे में जनसंख्या का अनुपात पिछले आरक्षण यानी 2014 जैसा ही होगा। आशय यह है कि अजा-अजजा के लिए आरक्षण में बदलाव नहीं होगा।

50% महिला आरक्षण बाय रोटेशन

मप्र में नगरीय निकायों में 50% महिला आरक्षण बाय रोटेशन होता है। यानी पिछली बार महिला वर्ग के लिए आरक्षित निकाय इस बार अनारक्षित होंगे। इसका आशय यह हुआ कि पिछली बार अनारक्षित रहे नगर निगम इस बार महिला वर्ग के लिए आरक्षित होंगे। लाॅट निकालने में कई बार तकनीकी पेंच आ जाते हैं, जिसमें कभी स्थिति बदल भी जाती है।

वोट बैंक का पूरा है खेल

माना जाता है कि शहरी वोट बैंक हमेशा भाजपा के साथ जाता है जबकि ग्रामीण में कांग्रेस का आज भी अच्छा वजूद है। ऐसे में सरकार मेयर का चुनाव सीधे कराना चाहती है ताकि चेहरा कोई भी हो लोग पार्टी देखकर वोट करें। जबकि कांग्रेस पार्षदों के जरिए चुनना चाहती थी जिसे शिवराज सरकार ने पलट दिया।

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