रायपुर : छत्तीसगढ़ सरकार की बहुआयामी नरवा, गरवा, घुरवा और बाड़ी विकास योजना के क्रियान्वयन का मूर्तरूप जमीनीस्तर पर दिखने लगा है और किसानों को इसका अच्छा लाभ मिल रहा है। इसी में से एक बाड़ी विकास योजना है, राज्य के अनेक किसानों के लिए यह आमदनी का बेहतर साबित हो रहा है। कोरोना संकट में लॉकडाउन के दौरान दंतेवाड़ा जिले के भरमबंद गांव के किसान अजमन यादव ने सब्जी बेचकर लगभग एक लाख रूपए अर्जित किया है। वह एक साधारण किसान है और इस संकटकाल में भी उनके 6 सदस्यों का परिवार बेहतर तरीके से अपना जीवन यापन कर रहा है।
छत्तीसगढ़ सरकार की बाड़ी विकास योजना से प्रभावित होकर अजमन का उद्यानिकी फसल की ओर रूझान बढ़ा और उद्यानिकी विभाग से सम्पर्क कर उन्होंने उन्नत तरीके से उद्यानिकी फसल उत्पादन करने की इच्छा जाहिर की। विभाग के कर्मचारियों की सलाह से सूक्ष्म सिंचाई योजना वन-ड्राप मोर-क्राप एवं मल्चिंग की उन्नत तकनीकी से कम लागत पर अधिक आमदनी कर पिछले दो वर्षो से टमाटर, भिण्डी, बरबटी, करेला आदि सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं, जिससे लगभग 60 से 80 हजार रूपये की आमदनी हुई है। इसके पूर्व किसान अजमन यादव पारम्परिक तरीके से केवल धान का फसल ही लगाते थे। पिछले दो वर्षों से अपने घर के पास सीमित भूमि में साग-सब्जी लगाना प्रारम्भ किया जिससे उसे 30 से 40 हजार की आय प्राप्त होती थी। अब वे उन्नत तकनीकी आपना कर साग-सब्जी का उत्पादन कर अच्छी आमदनी प्राप्त कर रहे हैं। अजमन यादव ने बताया कि इस वर्ष 2 एकड़ भूमि में बरबट्टी, करेला एवं खीरा का फसल ड्रिप एवं सिंचाई पद्धति से खेती कर रहे हैं। उद्यानिकी फसल अपना कर अजमन बहुत खुश है, और अब उसे दूसरे जगह काम की तलाश में नहीं जाना पड़ता है।