नई दिल्ली । बच्चों के लिए कोविड-19 का टीका गर्मियों के अंत तक आ सकता है। बच्चों के लिए टीका बनाने में जुटीं कंपनियों के परीक्षण का शुरुआती डाटा जून-जुलाई तक आने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि डाटा उपलब्ध होते ही कंपनियां सरकार से टीके के आपातकालीन उपयोग के लिए आवेदन करेंगी। अनुमति मिलते ही बच्चों का टीकाकरण शुरू हो जाएगा। कोविड-19 टीका बनाने वाली अमेरिका की दो नामी कंपनियां फाइजर-बायोएनटेक और मॉडर्ना 12 से 15 साल तक की आयु वाले बच्चों पर तीसरे चरण का परीक्षण कर रही हैं। दोनों कंपनियों ने जनवरी के अंतिम सप्ताह में परीक्षण शुरू कर दिया था। अभी फाइजर-बायोएनटेक के मौजूदा कोविड-19 टीके को 16 साल से अधिक उम्र वालों के इस्तेमाल की मंजूरी मिली हुई है। यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड स्कूल ऑफ मेडिसिन के बाल विशेषज्ञ डॉ. जेम्स चैम्पबेल का कहना है कि 12 से 15 आयुवर्ग के बच्चों को चुनने का कारण उनके शरीर का आंशिक रूप से वयस्कों की तरह व्यवहार करना है। ब्रिटेन में एस्ट्राजेनेका ने भी फरवरी में 12 साल से अधिक उम्र के बच्चों के लिए टीके का परीक्षण शुरू कर दिया है। इस ट्रायल के लिए ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी को स्वेच्छा से वैक्सीन लगवाने वाले छह से 17 साल आयु वर्ग के 300 बच्चों की जरूरत है। इनमें से 240 को कोविड-19 का जबकि बाकी 60 को मेनिनजाइटिस का टीका लगाया जाएगा। ऑक्सफर्ड वैक्सीन ट्रायल के मुख्य रिसर्चर एंड्रयू पोलार्ड के अनुसार, अब तक बच्चों पर कोरोना वायरस संक्रमण का असर नहीं देखा गया है लेकिन उनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करने के लिए टीका देना जरूरी है। वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कोविड-19 वैक्सीन की खुराक गर्मी के आखिर तक मुहैया हो सकती है। बाइडेन सरकार के चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉक्टर एंथनी फाउची ने हाल में यह दावा किया। प्रमुख अमेरिकी टीका निर्माता कंपनियां इस टीके के लिए परीक्षण भी शुरू कर चुकी हैं। फाउची ने कहा कि गर्मी के अंत तक हम कम से कम एक ऐसी वैक्सीन जरूर उपलब्ध करवा सकेंगे। दरअसल बाइडेन सरकार चाहती है कि वह अपने सौ दिन का कार्यकाल पूरा होने तक बच्चों के लिए टीका बाजार ले आए ताकि कम से कम प्राथमिक स्कूल दोबारा शुरू हो सकें। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने फरवरी में कहा कि वह अक्तूबर तक बच्चों के लिए टीका तैयार कर लेगी। कंपनी के आयात-निर्यात निदेशक पीसी नांबियार ने कहा कि यह वैक्सीन बच्चों को उनके जन्म के एक महीने के भीतर लगाई जाएगी। साथ ही कंपनी इसी वैक्सीन को आगे एक दवा के रूप में विकसित करेगी ताकि यदि बच्चे कोरोना से संक्रमित हों तो उन्हें यह दी जा सके। दूसरी ओर, विशेषज्ञ मानते हैं कि जल्द ही भारत बायोटेक को भी 5-18 वर्ष की आयु के बच्चों पर कोवैक्सीन के तीसरे चरण का परीक्षण करने की अनुमति मिल सकती है। हाल में जारी हुए वयस्कों पर वैक्सीन के प्रभाव का डाटा इसकी 83 प्रतिशत प्रभावशीलता दिखाता है।