माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का पालन नहीं कर रहा सेल-बीएसपी

माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का पालन नहीं कर रहा सेल-बीएसपी

हिंदी में प्रति उपलब्ध कराने सिर्फ खानापूर्ति कर दी मैनेजमेंट ने, प्रार्थी ने फिर भेजा आवेदन

भिलाई । माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर द्वारा सेल-बीएसपी को लीज बेदखली से संबंधित वाद में हिंदी की प्रति दिए जाने के आदेश का पालन नहीं हो रहा है। सेल-बीएसपी मैनेजमेंट ने सिर्फ खानापूर्ति के लिए आवेदक को सिर्फ 3 पृष्ठ का अनुवाद उपलब्ध करा दिया है।
जबकि माननीय उच्च न्यायालय के आदेशानुसार आवेदक को इस मामले से जुड़ी समस्त फाइल (एनेक्सचर सहित) का हिंदी अनुवाद देना था। आवेदक ने इसे माननीय उच्च न्यायालय की अवहेलना बताते हुए अपने अधिवक्ता के माध्यम से सेल-बीएसपी संपदा न्यायालय में वाद दाखिल किया है।
उन्होंने बताया कि परिवाद क्रमांक 19/2012, दिनांक 25 फरवरी 2012 की कंडिका क्रमांक 3 के अनुसार अनावेदक के पक्ष में निष्पादित पट्टा पेज-सी-1 से 36 पृष्ठ एवं कंडिका 6 के अनुसार 9 मई 2011 से 25 जनवरी 2012 तथा आदेश दिनांक 25 जनवरी 2014 दस्तावेज पृष्ठ 45 तथा अनावेदक के अावंटित भूमिखंड को रद्द किए जाने के संबंध में पृष्ठ 45 एनेक्सर परिवाद पत्र के साथ हिंदी अनुदित प्रमाणित प्रतिलिपि उपलब्ध कराई जानी है।
उल्लेखनीय है कि जयप्रकाश नारायण स्मारक प्रतिष्ठान एचएससीएल कालोनी रूआबांधा के अध्यक्ष आरपी शर्मा के विरुद्ध भिलाई स्टील प्लांट संपदा न्यायालय में बेदखली का मामला लंबित है। जिसमें आर पी शर्मा ने माननीय संपदा अधिकारी बीएसपी द्वारा अंग्रेजी में प्रस्तुत बेदखली प्रकरण की हिंदी अनुदित प्रति चाही थी।
जिसके लिए आर पी शर्मा ने 24 दिसंबर 2020 को बाकायदा मैनेजमेंट को लिखित में अनुरोध किया था। लेकिन बीएसपी प्रबंधन ने आर पी शर्मा के इस आवेदन को 14 जनवरी 2021 को खारिज कर अनर्गल टिप्पणी करते हुए हिंदी अनुवाद देने से इनकार कर दिया था।
इस पर शर्मा ने पूरे मामले की शिकायत भारतीय इस्पात प्राधिकरण (सेल) की चेयरमैन सोमा मंडल, निदेशक, राजभाषा केंद्रीय गृह मंत्रालय, राजभाषा प्रमुख व निदेशक प्रभारी भिलाई स्टील प्लांट और संपदा अधिकारी भिलाई स्टील प्लांट से 18 जनवरी 2021 को की थी।
इसके बावजूद कोई पहल नहीं होने पर आर पी शर्मा ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर में 25 जनवरी 2021 को सेल-बीएसपी के विरुद्ध वाद दाखिल किया था। इस मामले में माननीय उच्च न्यायालय बिलासपुर ने 12 फरवरी को अपना फैसला सुनाया। जिसमें माननीय न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि-‘उत्तरवादी को यह निर्देशित किया जाता है कि संपदा अधिकारी के समक्ष मूल वाद की हिंदी में अनुवादित प्रति और अनुलग्नकों (एनेक्सर्स) सहित आगामी पेशी तिथि पर या कोई बढ़ाई गई पेशी तिथि पर प्रस्तुत करें। आगे यह भी बताया जाता है कि याचिका कर्ता संपदा अधिकारी के समक्ष लंबित कार्यवाही में अनावश्यक स्थगन/विलम्ब नहीं करेगा, यथासंभव शीघ्र निष्कर्ष निकाला जाए।’
माननीय उच्च न्यायालय के इस आदेश के बाद सेल-बीएसपी मैनेजमेंट ने आरपी शर्मा को खानापूर्ति के नाम पर सिर्फ तीन पृष्ठ का हिंदी में दस्तावेज उपलब्ध कराया है। जिसमें न तो जारी करने वाले संस्थान की मुहर है और न ही किए गए हस्ताक्षर का पद स्पष्ट रूप से उल्लेखित है। आवेदक आरपी शर्मा ने कहा कि उन्हें समस्त मूल वाद की हिंदी में अनुवादित प्रति और अनुलग्नकों (एनेक्सर्स) सहित उपलब्ध कराई जाए। अन्यथा माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना का मामला दाखिल करेंगे।

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