भिलाई / सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के पर्यावरण प्रबंधन विभाग ने 26 मार्च, 2021 को सीजीएम इंचार्ज (एम एंड यू) कान्फ्रेंस हॉल में स्टील उद्योग में वेस्ट गैस और ठोस अपशिष्ट का पुनर्चक्रण कर उपयोग पर एक कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का आयोजन स्वच्छता पखवाड़ा के भाग के रूप में सेल के सभी इकाइयों में किया जा रहा है।
कार्यशाला में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के शुरुआत में सभी प्रतिभागियों द्वारा स्वच्छता शपथ ली गई। प्रतिभागियों ने अगले कुछ वर्षों में स्वच्छ भारत के दृष्टिकोण को अपना कर समाज में गुणात्मक परिवर्तन लाने की दिशा में अपने विचार व्यक्त किये।
कार्यशाला के लिए चुने गए विषयों पर तकनीकी पेपर प्रस्तुत किए गए। ऊर्जा प्रबंधन विभाग द्वारा प्रतिभागियों को गैसीय अपशिष्टों पुनर्चक्रण के द्वारा विद्युत उत्पादन और उसकी पूरी प्रक्रिया के बारे में जानकारी देने के लिए प्रस्तुतीकरण किया गया। गैसीय अपशिष्टों के पुनःचक्रण कर सयंत्र के फिनिशिंग मिलों में इंधन के रूप में उपयोग से पर्यावरणीय लाभ, कोक ओवन बैटरी-11 के सीडीसीपी, ब्लास्ट फर्नेस-8 के टीआरटी जैसे उपकरण से विद्युत उत्पादन आदि पर प्रस्तुतीकरण के दौरान प्रकाश डाला गया।
सेल-बीएसपी में प्राकृतिक ऊर्जा के प्रयोग का सबसे ज्यादा लाभ बॉयलर में ईंधन के रूप में गैसीय अपशिष्टों का प्रयोग कर बॉयलर कोयले के प्रतिस्थापन करने से हुआ है। साथ ही कार्बन-डाइ-ऑक्साइड एवं धूल-कण का उत्सर्जन कम हुआ है एवं मिट्टी और जल प्रदूषण और हाउसकीपिंग की समस्यायें भी कम हुई है।
बीएसपी के एसएमएस-2 के महाप्रबंधक डी के अग्रवाल ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर एक प्रस्तुतीकरण प्रस्तुत किया गया जिसमें ठोस कचरा प्रबंधन के कानूनी और पर्यावरणीय पहलुओं, विभिन्न प्रकार के अपशिष्ट उत्पन्न और वर्तमान में अपशिष्ट के उपयोग और प्रबंधन शामिल किया गया और बीएसपी की अपषिष्टों के उपयोग की नवीनतम पहल को कार्यशाला में उपस्थित जन के साथ साझा किया।
संयंत्र के यूनीवर्सल रेल मिल (यू आर एम) विभाग के समूह ने पूरी तरह से आंतरिक संसाधनों के साथ उत्कृष्ट पहल कर स्केल रिमूवल फिल्टर्स (एसआरएफ) से अपशिष्ट जल के पुनर्चक्रण कर एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट को वापस भेज देने की प्रक्रिया को यू आर एम के महाप्रबंधक संजय कुमार द्वारा प्रतिभागियों से साझा किया गया।
मेसर्स नाल्को वाटर्स के प्रतिनिधियों द्वारा प्रस्तुतीकरण दिया गया। इनके द्वारा विकसित की गयी धूल पृथक करने की नवीनतम तकनीको को दर्शकों के साथ साझा किया गया। नाल्को वाटर्स द्वारा प्रयुक्त की जाने वाली तकनीकियाँ न केवल पूंजी निवेश को खत्म और कम करती हैं बल्कि मौजूदा प्रणालियों में मामूली संशोधनों के साथ लागू करने के लिए बहुत आसान हैं और स्वच्छ धूल-मुक्त वातावरण में कार्य करने के उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त कर सकते हैं।
कार्यशाला में मुख्य महाप्रबंधक प्रभारी (एम एंड यू), अरविंद कुमार मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। इस अवसर पर मुख्य महाप्रबंधक (सीओसीसीडी), अच्युता राव, मुख्य महाप्रबंधक (एसएमएस-2) वी के धवन, मुख्य महाप्रबंधक (मैकेनिकल) एस के कटारिया, मुख्य महाप्रबंधक (एनवायरमेंट मैनेजमेंट) सत्य प्रकाश, मुख्य महाप्रबंधक (वाटर मैनेजमेंट), सीके नारायण, मुख्य महाप्रबंधक (मैकेनिकल) एस के गजभिए एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों शामिल हुए।
कार्यशाला का संचालन एवं समन्वय महाप्रबंधक (पर्यावरण प्रबंधन विभाग), श्रीमती उमा कटोच ने किया। विभाग के अन्य अधिकारियों ने मुख्य महाप्रबंधक (पर्यावरण प्रबंधन विभाग), सत्य प्रकाश के मार्गदर्शन में तकनीकी प्रस्तुतीकरण देने वालों को स्मृति चिन्ह प्रदान किए गए।
संयंत्र के अंदर हरियाली बनाए रखने और हरित पहलों के लिए अपने प्रयासों में विभिन्न विभागों की मदद करने के लिए योगदान की प्रशंशा में सिविल इंजीनियरिंग विभाग को एक स्मृति चिन्ह भी प्रदान किया गया। कार्यक्रम के अंत में महाप्रबंधक (पर्यावरण प्रबंधन विभाग) ए के प्रवीण, द्वारा प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया गया।