एंटीलिया कार केस: एक महीने बाद भी नहीं खुल पाए ये 9 राज, जानें- किन जवाबों का इंतजार

एंटीलिया कार केस: एक महीने बाद भी नहीं खुल पाए ये 9 राज, जानें- किन जवाबों का इंतजार

मुंबई | मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर विस्फोटक से भरी लावारिस स्कॉर्पियो गाड़ी मिले 37 दिन बीत चुके हैं। इतना ही नहीं 5 अप्रैल यानी आज इस गाड़ी के कथित मालिक मनसुख हिरेन की संदिग्ध हालत में लाश को मिले भी एक महीना पूरा हो चुका है। मामले में मुंबई के पुलिस अधिकारी सचिन वाझे मुख्य आरोपी हैं। दो जांच एजेंसियां एनआईए और महाराष्ट्र एटीएस इस मामले की जांच कर रही थी लेकिन अब तक इस मामले से जुड़े 9 सवाल ऐसे हैं जिनके जवाब नहीं मिल पाए हैं।

1. अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर एसयूवी क्यों छोड़ी गई थी?
एनआईए के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि मुंबई क्राइम ब्रांच के क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट (CIU) के पूर्व प्रमुख सचिन वाझे ने अपनी खोई साख वापस पाने के मकसद से मुकेश अंबानी के घर के बाहर गाड़ी खड़ी की थी। एनआईए का कहना है कि वह मुंबई पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को यह साबित करना चाहता था कि वह अब भी केस सुलझाने में सक्षम है।

2. क्या निलंबित मुंबई पुलिस अधिकारी सचिन वाझे ने अकेले रची थी साजिश?
एनआईए ने एंटीलिया केस में अब तक 35 लोगों का बयान रिकॉर्ड किया है लेकिन गिरफ्तारी सिर्फ एक की ही हुई है और वह है वाझे। गाड़ी के साथ एंटीलिया के बाहर एक धमकी भरी चिट्ठी भी थी जिसके तार दिल्ली की तिहाड़ जेल तक जुड़े लेकिन इस मामले में अब तक कोई स्पष्टता नहीं मिली।

3. स्कॉर्पियो में रखी गई जिलेटिन की 20 छड़े कहां से आईं?
जिलेटिन की छड़े न सिर्फ सस्ती होती हैं बल्कि इस विस्फोटक को रखना भी आसान है। हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि स्कॉर्पियो में जो जिलेटिन छड़े मिलीं वह कहां से खरीदी गईं और किसने खरीदी। ये छड़े नागपुर की सोलर इंडस्ट्रीज लिमिटेज ने बनाई थी।

4. मनसुख हिरेन को क्यों मारा गया?
इस जरूरी सवाल का जवाब अभी तक नहीं मिल सका है कि 48 वर्षीय व्यापारी मनसुख हिरेन की मौत कैसे और क्यों हुई। हिरेन की पत्नी ने एटीएस को जो बयान दिया उसके मुताबिक, वाझे और हिरेन एक-दूसरे को सालों से जानते थे। वाझे ने हिरेन से चार महीने के लिए वह संदिग्ध स्कॉर्पियो गाड़ी भी ली थी और 5 फरवरी को लौटाई थी। इतना ही नहीं, हिरेन का बड़ा भाई विनोद उस रात भी वाझे के संपर्क में था जिस रात से हिरेन लापता था।

5. हिरेन की अंगूठी, घड़ी, पर्स कहां हैं?
जब हिरेन की लाश ठाणे में नदी किनारे मिली तो उसका चेहरा ढका था और मुंह में कई रूमाल ठूसे हुए थे। हिरेन का निजी सामान जैसे घड़ी, पर्स और मोबाइल गायब हैं। हिरेन की पत्नी के मुताबिक, 4 मार्च को जब वह घर से निकला तो यह सब लेकर निकला लेकिन कई जगह तलाशी करने के बाद भी ये सामान अब तक हाथ नहीं लगे हैं।

6. 17 फरवरी को हिरेन और वाझे क्यों मिले थे?
हिरेन की पत्नी विमला के बयान के मुताबिक, 17 फरवरी को हिरेन ने अपनी स्कॉर्पियो वाझे को दी थी। इतना ही नहीं हिरेन ने ही विखरोली में गाड़ी खड़ी की थी। छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के पास लगे सीसीटीवी कैमरा के फुटेज के मुताबिक, हिरेन ने क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट ऑफिस के बाहर वाझे से मुलाकात की थी। दोनों थोड़ी देर के लिए मर्सडीज गाड़ी में बैठे और फिर हिरेन वहां से चला गया।

7. ट्राइडेंट होटल की सीसीटीवी फुटेज में दिखी महिला कौन थी?
एनआईए को ट्राइडेंट होटल के सीसीटीवी फुटेज में एक महिला दिखी। यह वही होटल था जिसमें वाझे रुका था। फुटेज में महिला को वाझे से बातचीत करते देखा गया और उसके हाथ में नोट गिनने वाली मशीन थी। एक और फुटेज में महिला को अगली सुबह होटल से जाते देखा गया। एनआईए ने इस महिला का पता लगा लिया है और बयान भी रिकॉर्ड कर लिया है। हालांकि, महिला की पहचान अभी भी जाहिर नहीं की गई है।

8. क्या चोरी की हुई मारूति इको भी पूरे मामले में शामिल थी?
28 मार्च को एनआईए को मीठी नदी से एक लैपटॉप, एक प्रिंटर, दो हार्ड डिस्क, दो सीपीयू, दो डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर आदि मिले थे, जो कथित तौर पर जानबूझकर नदी में फेंके गए थे। इतना ही नहीं एनआईए को नदी में मारुति इको गाड़ी की एक नंबर प्लेट भी मिली जो नवंबर 2020 में औरंगाबाद से चोरी हुई थी। यह अभी भी सवाल है कि इस नंबर प्लेट और गाड़ी का पूरे मामले से क्या लेना-देना है।

9. क्या पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह के अनिल देशमुख और सचिन वाझे पर लगाए आरोपों का इस केस से संबंध है?
मुंबई पुलिस कमिश्नर पद से हटाए जाने के बाद 20 मार्च को परमबीर सिंह ने मुख्यमंत्री को एक चिट्ठी लिखी, जिसमें आरोप लगाया गया कि राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने सचिन वाझे सहित कुछ पुलिस अधिकारियों को हर महीने 100 करोड़ रुपये की उगाही करने का आदेश दिया था। देशमुख ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। परमबीर सिंह के आरोपों की जांच के लिए रिटायर्ड जस्टिस केयू चांदीवाल की अध्यक्षता में एक सदस्यीय कमेटी बनाई गई। विपक्षी पार्टी बीजेपी का आरोप है कि सीनियर नेता वाझे को बचाने की कोशिश कर रहे थे।

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