सेल के “कर्मचारी परिवार हितलाभ योजना” से बीएसपी के हजारों परिवार हुए लाभान्वित

सेल के “कर्मचारी परिवार हितलाभ योजना” से बीएसपी के हजारों परिवार हुए लाभान्वित

सेल की “ईएफबीएस”” सामाजिक सुरक्षा की ऐसी स्कीम है जिसका अनुसरण अन्य कंपनियां कर रही हैं.

भिलाई। सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र सदैव ही कार्मिक हितैषी संगठन के रूप में जाना जाता रहा है। सेल ने अपने कार्मिकों के हितों हेतु सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने में एक अग्रणी संस्थान के रूप में अपनी अहम भूमिका का निर्वहन किया है। 32 वर्ष पूर्व सेल ने एक ऐसे ही एक सामाजिक सुरक्षा योजना ”कर्मचारी परिवार हितलाभ योजना” जिसे हम “ईएफबीएस”” के लघु नाम से भी जानते है की शुरूआत की थी। उस वक्त सेल ने ऐसी सामाजिक सुरक्षा को प्रारम्भ करने वाली देश की पहली संस्थान के रूप में अपनी पहचान बनायी।
सेल की इस सामाजिक सुरक्षा योजना “ईएफबीएस” की पूरे देश भर में तारीफ हुई। आने वाले समय में देश की अनेक सरकारी व निजी कंपनियों ने सेल का अनुसरण किया और विभिन्न संषोधनों के साथ अपनी-अपनी कंपनियों में इस योजना को लागू किया। सेल की इस योजना ने कार्मिकों के परिवार को आर्थिक संबलता देने के साथ ही सामाजिक स्तर को बनाये रखने में अहम भूमिका निभायी है।

ईएफबीएस”क्या है-
“कर्मचारी परिवार हितलाभ योजना” जिसे हम शाॅर्ट में “ईएफबीएस”” कहते हैं इसे सेल में 1 जनवरी, 1989 से लागू किया गया। इसके तहत वे कार्मिक जिनका सेवा में रहते हुए निधन हो गया हो या फिर परमानेंट मेडिकल अनफिट के कारण स्थायी अपंगता आ गई हो, उनका परिवार इस योजना का लाभ उठा सकता है। इस हेतु उसे मृत्यु या अपंगता की तिथि से 6 माह के भीतर अपनी सहमति देनी होती है।
इस योजना के तहत कार्मिक के परिवार को कार्मिक के रिटायरमेंट तारीख तक मृत अथवा परमानेंट मेडिकल अनफिट कार्मिक के अंतिम बेसिक व मंहगाई भत्ता के बराबर की राशि प्रतिमाह इस परिवार को मिलती रहेगी। इस हेतु कार्मिक परिवार को कार्मिक का सीपीएफ एवं ग्रेच्युटी राषि प्रबंधन के पास जमा रखना होगा। जो कार्मिक के सेवानिवृत्ति की तिथि पर कार्मिक के परिवार को वापस कर दी जायेगी। इस प्रकार यह योजना कार्मिक परिवार को अपने जीवन स्तर को बनाये रखने में सक्षम बनाती है। साथ ही वह अपने सामाजिक दायित्वों को बखूबी निर्वहन कर पाता है।

लाभान्वित परिवार पर एक नज़र-
सेल के इस बहुचर्चित व संवेदनषील सामाजिक सुरक्षा की इस योजना “ईएफबीएस” का अब तक भिलाई इस्पात संयंत्र के 3301 कार्मिक परिवारों ने लाभ उठाया है। इसमें वर्तमान में कोविड से मृत हुए 30 कार्मिक परिवार शामिल है। सेल की इस योजना ने भिलाई के हजारों इस्पाती परिवार को संकट से उबारा है। उनके आषाओं व आकांक्षाओं को टूटने से बचाया है। परिवार के सामाजिक हैसियत की भी रक्षा की है।

लाभान्वित परिवार से चर्चा-
सेल के इस योजना का लाभ उठाने मल्होत्रा परिवार के सभी सदस्य सेल व बीएसपी के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए कहते है कि बीएसपी ने उनके परिवार की मदद करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा। इस परिवार की मुखिया व मृत कार्मिक की पत्नी इस योजना की खासियत बताते हुए अपने अनुभव को साझा करते हुए कहती है कि उनके पति संजय मल्होत्रा जी की मृत्यु वर्ष 2015 में हो गई। उन्हांने बीएसपी के “ईएफबीएस”” योजना का लाभ उठाने हेतु सहमति दी। विगत 6 वर्षो से मुझे मेरे पति के अंतिम बेसिक व डीए का हर माह भुगतान हो रहा है। इस राशि ने मेरे परिवार की आत्मनिर्भरता को बनाये रखने के साथ ही मेरे पति के सपने को भी पूरा करने में अहम भूमिका निभायी है।

बातचीत के दौरान श्रीमति सीमा मल्होत्रा पुरानी यादों को स्मरण करते हुए कहती है कि मेरे पति की बड़ी इच्छा थी कि उनकी दोनों बेटियां हर्षा व दिशा डाॅक्टर व इंजीनियर बनें। आज इस सपने को मैने बीएसपी के सहयोग से पूरा किया है। आज हमारी एक बेटी डाॅक्टर बन चुकी है और दूसरी ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के साथ ही एमबीए की पढ़ाई भी पूर्ण कर ली है। सेल-बीएसपी के इस स्कीम ने मेरे पति के जाने के बाद भी हमारे परिवार के सपने को बिखरने नहीं दिया। हमें अपने सामाजिक ओहदा से लेकर जीवनषैली को बनाये रखने में भारी मदद की है। सबसे बड़ी बात है कि मेरे स्वर्गीय पति के रिटायरमेंट होने की तारीख तक हमें हर महीने यह राशि मिलती रहेगी और अंत में उनके सीपीएफ और ग्रेच्युटी की राषि भी हमें वापस मिल जायेगी।
अपने वक्तव्य के अंत में श्रीमति सीमा मल्होत्रा सेल-बीएसपी को धन्यवाद देते हुए कहती है कि बीएसपी के “ईएफबीएस” योजना ने जहां मेरे आर्थिक स्थिति को संभाला वहीं बीएसपी द्वारा प्रदत्त मेडिकल सुविधाएं मेरे सेहत को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है। मैं बीएसपी को दिल से थैंक्यू बोलना चाहती हूँ।
सामाजिक सुरक्षा योजना के साथ-साथ, सेल-बीएसपी ने सदैव ही कार्मिकों के प्रति संवेदनषीलता दिखाते हुए कई सुविधाएं उपलब्ध करायी है। इसका ताजा उदाहरण है कोविड के दौरान कोविड से मृत कार्मिकों के परिवार के पात्र सदस्यों को मेडिकल सुविधा प्रदान करना। यही वजह है कि सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र एक केयरिंग संस्थान के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुका है।

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