भिलाई। सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के मेकेनिकल जोन में विभागीय राजभाषा कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्य महाप्रबंधक (याँत्रिकी), सुनील कुमार कटारिया, मुख्य महाप्रबंधक (याँत्रिकी), संजय गजभिये, महाप्रबंधक प्रभारी (सीएचएम एवं सीआरएम), संजय कुमार गाँधी एवं महाप्रबंधक प्रभारी (याँत्रिकी सेवाएँ), डॉ जे पी पाण्डेय उपस्थित थे।
विभागीय राजभाषा कार्यशाला का आयोजन भिलाई इस्पात संयंत्र के राजभाषा विभाग के सौजन्य से एम एंड यू सभागार में किया गया। राजभाषा विभाग के जितेन्द्र दास मानिकपुरी, सहायक प्रबंधक एवं उनकी टीम ने इस कार्यशाला के महत्त्व को समझाते हुए हिंदी यूनिकोड एवं हिंदी वॉइस टंकण का प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण दिया। कार्यशाला में राजभाषा प्रोत्साहन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया तथा विजेताओं को मुख्य अतिथि द्वारा पुरस्कृत किया गया।
प्रतियोगिता में प्रदर्शन के आधार पर 08 प्रतिभागियों को विजेता घोषित किया गया और पुरस्कार वितरित किये गए। प्रथम पुरस्कार विजेता अनिल कुमार चैरे, सहायक महाप्रबंधक, सीआरएम (यांत्रिक), द्वितीय पुरस्कार विजेता धर्मा रेड्डी, एसीटी, सीएचएम-4, तथा तृतीय स्थान पर कामय्या मार्ति, वरिष्ठ प्रबंधक, सीईडी रहे।
प्रोत्साहन पुरस्कार विजेता रहे अनिल एन भावे, वरिष्ठ प्रबंधक, सीआरएम (यांत्रिक), सुजीत कुमार तिवारी, चार्जमेन कम सर्वेयर, ईबीएसआई, प्रवीण राय, सहायक प्रबंधक, भवन एवं संरचना, के सुरेश, वरिष्ठ मानचित्रकार, ईडीडी एवं हेमंत देवांगन, वरिष्ठ प्रबंधक, ईडीडी रहे। कार्यक्रम में के सुरेश, वरिष्ठ मानचित्रकार, ईडीडी ने ‘संयंत्र ही सर्वोपरि है……” पर स्वरचित कविता पाठ का वाचन किया।
मुख्य अतिथि एस के कटारिया ने इस अवसर पर अपने उद्बोधन में राजभाषा विभाग के हिंदी को प्रोत्साहित करने के सतत प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि मेकेनिकल जोन में हिंदी के शत-प्रतिशत प्रयोग के लक्ष्य को प्राप्त करने एवं हिंदी के प्रयोग के प्रचार-प्रसार करने की आवश्यकता है। मुख्य अतिथि संजय गजभिये ने हिंदी को सरल एवं सुलझी हुई भाषा बताया, जिसके माध्यम से हम अपनी भावनाओं को सरलता से व्यक्त कर सकते हैं। उन्होंने हिंदी का लेखन कार्य में अधिकाधिक उपयोग करने की बात कही।
विशिष्ठ अतिथि संजय गाँधी ने कहा कि ज्यादातर अंतर्विभागीय कार्य जैसे कि नोटशीट एवं नोटिंग अंग्रेजी भाषा में किये जाते हैं, इन सब कार्यों को हिंदी में ही किया जाना चाहिए। इसी प्रकार विशिष्ट अतिथि डॉ जे पी पाण्डेय ने अपने उद्बोधन में विनोबा भावे जी के भिलाई प्रवास के समय को याद करते हुए राजभाषा हिंदी को प्रोत्साहित करने की बात कही।
कार्यशाला के अंत में जितेन्द्र दास मानिकपुरी, सहायक प्रबंधक ने राजभाषा की शपथ दिलाई एवं सभी से अनुरोध किया कि राजभाषा अधिनियम 1963 के समस्त सांविधिक प्रावधानों तथा धारा 3(3) के अंतर्गत निर्धारित समस्त 14 प्रकार के कागजात को द्विभाषी में जारी किया जाना चाहिए। कार्यक्रम का संचालन गितेश देवांगन, वरिष्ठ प्रबंधक (याँत्रिकी सेवाएँ) ने किया तथा कार्यशाला का सम्पूर्ण समन्वयन के नीलाधर, प्रबंधक (सीएचएम योजना) ने किया।