कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी भंग?कमलनाथ ने वरिष्ठ नेताओं से मंत्रणा के बाद लिया निर्णय-खिलावन चंद्राकर

कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी भंग?कमलनाथ ने वरिष्ठ नेताओं से मंत्रणा के बाद लिया निर्णय-खिलावन चंद्राकर

भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री और पीसीसी चीफ कमलनाथ के भोपाल स्थित आवास पर प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के साथ हुई मंथन और आपसी मंत्रणा के बाद प्रदेश के मौजूदा कार्यकारिणी को भंग कर दिया गया है. इस निर्णय के बारे में पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने बैठक से बाहर निकल कर मीडिया कर्मियों को दी और संकेत दिया की शीघ्र ही मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी में बड़ा परिवर्तन होगा। बैठक में हुए इस निर्णय की पुष्टि सज्जन सिंह वर्मा के विश्वसनीय साथी और कांग्रेस नेता मनोज राजानी ने भी की है। जबकि प्रदेश कांग्रेस के कई पदाधिकारियों ने इस तरह के किसी निर्णय की जानकारी होने से इनकार किया है।
माना जा रहा है कि पीसीसी चीफ कमलनाथ पार्टी हाईकमान से चर्चा के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस को सक्रिय और संगठन को मजबूत बनाने की दृष्टि से कई फार्मूला लेकर दिल्ली से भोपाल लौटे हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने आज दिन भर अपने निवास पर पार्टी के दिग्गज नेताओं के साथ चर्चा की। पार्टी सूत्रों ने बताया कि इसमें तीन विधानसभा और एक लोक सभा उपचुनाव की तैयारियों और प्रत्याशी चयन को लेकर मंथन हुआ। बैठक से बाहर निकलकर वर्मा ने कहा कि जिस तरह दमोह उपचुनाव में कांग्रेस पूरी ताकत के साथ लड़ी और जीती, उसी के अनुरूप ही विशेष रणनीति तैयार की जा रही है. इसके तहत बूथ और मंडलम स्तर पर बदलाव कर क्षेत्र के अलग-अलग नेताओं को जिम्मेदारी दी जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि शीघ्र ही महिला कांग्रेस के साथ ही एनएसयूआई और अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्षों की नियुक्ति भी की जाएगी। इसके लिए पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं से रायशुमारी की जा रही है।
हो सकता है आंतरिक जांच का विषय
बता दें कि लगभग 3.5 साल पहले कमलनाथ ने प्रदेश कांग्रेस की कमान संभालते ही कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ प्रदेश पदाधिकारियों की नियुक्ति के साथ ही 4 कार्यकारी अध्यक्षों की नियुक्ति भी की थी। बाकी पूरी कार्यकारिणी को जस के तस रखा था। इसी बीच 28 विधानसभा उपचुनाव के दौरान ताबड़तोड़ तरीके से लगभग डेढ़ हजार प्रदेश पदाधिकारियों की नियुक्ति कर दी गई। बताया जा रहा है कि यह नियुक्तियां किनके आदेश से हुई यह पार्टी के लिए अंदरूनी जांच का विषय हो सकता है, किंतु सबसे आश्चर्यजनक बात यह भी है कि इस संदर्भ में कोई अधिकृत रिकॉर्ड प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में उपलब्ध नहीं है।

शेयर करें