दुर्ग। स्तनपान ही बच्चे का है पहला आहार, स्तनपान ही देगा उसको जीवन का आधार। स्तनपान करायें, कुपोषण को दूर भगाएं। इस साल 1 अगस्त से 7 अगस्त 2021 तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाएगा। परिचर्चा में आज जिला चिकित्सालय में ऑनलाइन कार्यशाला अध्यक्ष डॉ. सम्मीता पण्डा एवं डॉ. सीमा जैन डीबीएपी सेक्रेटरी के उपस्थिति में आयोजन हुआ। आईवायसीएफ के अध्यक्ष डॉ. आर सोमा सेकर ने बताया कि कोरोना काल में भी जन्म के तुरंत बाद से ही शिशु को स्तनपान कराएं। 1 घंटे के भीतर शुरू करा ही देना चाहिए। 6 माह तक मां का ही दूध इसके अतिरिक्त कुछ भी नहीं। मां का दूध ही शिशु के लिए संपूर्ण आहार है। छः माह बाद शिशु को संपूरक आहार भी दे। शिशु या मां बीमार हो तब भी स्तनपान कराएं। स्तनपान यानी मां का दूध प्रथम टीकाकरण है जो नवजात को बीमारी से बचाता है। स्तनपान बच्चे के स्वास्थ्य जीवन की आधारशिला है मां का दूध सर्वश्रेष्ठ ही नहीं जीवन रक्षक होता है। इस ऑनलाइन प्रोग्राम में शासन के राज्य नोडल अधिकारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. गंभीर सिंह ठाकुर, सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ पी बालकिशोर, केंद्रीय आईएपी डॉ. रूपा बेलाद, समाज सेवी श्रीमती उल्का जमाल एवं समस्त नर्सिंग कॉलेज के प्राचार्य, जिला अस्पताल में कार्यरत स्टाफ नर्स, बीएमओ मेडिकल ऑफिसर, मितानिन जिला समन्वय, सभी वर्चुवल मीटिंग में सम्मिलित हुए। आनलाईन कार्यशाला में रायपुर मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. फुलझले, पूर्व अध्यक्ष डॉ. एमएस ठाकुर, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद सावंत, केंद्रीय कार्यकारिणी प्रतिनिधि छत्तीसगढ़ राज्य आईएपी डॉ. अर्चना चौहान एवं कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।