मेदांता, फोर्टिस, आर्टेमिस, नारायणा समेत कुछ चुनिंदा अस्पताल ऐसे हैं, जहां इलाज के लिए बड़ी संख्या में अफगान मूल के लोग आते रहे हैं
सबने मिलकर किया दिल्ली कूच
दिल्ली। अफगानिस्तान पर तालिबान संकट के बाद एक-दूसरे की मदद के उद्देश्य से शहर में रह रहे अफगानिस्तानियों का नया ठिकाना अब दिल्ली का लाजपत नगर बन गया है। मेदांता अस्पताल के नजदीक रेस्तरां चला रहे अफगानिस्तान के मूल निवासी अहमद ने बताया कि तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तानी राष्ट्रीय संकट का सामना कर रहे हैं। ऐसे में एक-दूसरे का सहारा बनने व शरणार्थी के तौर पर भारत सरकार से मदद पाने के लिए यहां रह रहे अफगानिस्तानी अब एकजुटता प्रदर्शित कर रहे हैं।
यही वजह है कि सभी अफगानी अब दिल्ली के लाजपत नगर में एकत्र हो रहे हैं। इसी क्रम में मेदांता अस्पताल के नजदीक के इलाकों में रह रहे अफगानिस्तानी भी अब गुरुग्राम छोड़कर दिल्ली का रुख कर रहे हैं। मेदांता, फोर्टिस, आर्टेमिस, नारायणा समेत कुछ चुनिंदा अस्पताल ऐसे हैं, जहां इलाज के लिए बड़ी संख्या में अफगान मूल के लोग आते रहे हैं।
खासतौर पर मेदांता में ही अधिकांश मरीज इलाज के लिए आते हैं और सेक्टर-38, 39 में ही रह रहे हैं लेकिन इस समय लगभग सभी अफगानिस्तानी दिल्ली के लाजपतनगर का रुख कर चुके हैं। स्थिति यह है कि सेक्टर-38 स्थित काबुल होटल अफगान मूल के लोगों के लिए रहने का एक बड़ा अड्डा है, लेकिन तालिबान संकट के बाद पिछले कुछ दिनों से वह भी खाली पड़ा है।
बतौर शरणार्थी जरूरी सुविधाएं प्राप्त करना उद्देश्य
अफगानिस्तान के मूल निवासी अहमद ने बताया कि शरणार्थी के तौर पर लंबे समय तक भारत में रहना चाहते हैं। ऐसे में एकता दिखाकर भारत सरकार पर एक तरीके से रणनीतिक दबाव बनाकर वह अपने लिए शरणार्थी के तौर पर सभी जरूरी सुविधाएं प्राप्त करना चाहते हैं। यही वजह है कि जिले में मेडिकल व स्टूडेंट वीजा पर रह रहे अफगानी लोग भी अपने मूल के लोगों को समर्थन देने के लिए लाजपतनगर पहुंच रहे हैं। यहां तक कि मेदांता अस्पताल के नजदीक संचालित मेडिकल स्टोर भी बंद कर लोग दिल्ली जा रहे हैं।