आदर्श आचार्य, समर्पित शिक्षक और प्रेरक प्राचार्य डा.महेशचन्द्र शर्मा

आदर्श आचार्य, समर्पित शिक्षक और प्रेरक प्राचार्य डा.महेशचन्द्र शर्मा

विश्वभाषा संस्कृत में पी-एच.डी. के बाद डी.लिट्.करने वाले छत्तीसगढ़ राज्य में अभी तक एकमात्र शिक्षाविद्

5 सितंबर शिक्षक दिवस पर विशेष,

भिलाई। शास्त्रों से अच्छी बातों का केवल उपदेश नहीं देना अपितु अपने आचरण और व्यवहार में ढालकर उन्हें विद्यार्थियों को सिखानेवाले को आचार्य कहते हैं। अपनी शिक्षाओं को छात्र-छात्राओं के दिलोदिमाग में उतारने वाला होता है शिक्षक। प्रगतिमान् , प्रेरक और प्रोन्नत आचार्य ही प्राचार्य माना गया है। प्रायः आधी सदी तक पठन-पाठन में समर्पित रहे आचार्य डा. महेशचन्द्र शर्मा के व्यक्तित्व और कृतित्व में भी ये विशेषतायें देखी जा सकतीं हैं। वे 42 वर्ष की उच्चशिक्षा सेवा से भले ही सेवानिवृत्त हो गये हैं, तथापि सरस्वती की सेवा और विद्या की उपासना में वे प्रवृत्त हैं और रहेंगे भी।

10 पुस्तकें और 500 से अधिक लेख प्रकाशित

आचार्य डा.शर्मा अध्ययन,अध्यापन और अनुसन्धान के क्षेत्र में विख्यात नाम है। संस्कृत, हिन्दी और भाषाविज्ञान आदि तीन विषयों मे उच्चश्रेणी में एम.ए.के बाद देवभाषा,लोकभाषा और विश्वभाषा संस्कृत में पी-एच.डी. के बाद डी.लिट्.करनेवाले वे छत्तीसगढ़ राज्य में अभी तक एकमात्र शिक्षाविद् हैं। सर्वपल्ली डा.राधाकृष्णन् के दार्शनिक ग्रन्थों का भी उन्होंने पठन-मनन किया। अध्ययन,अध्यापन, अनुसन्धान, लेखन और प्रकाशन के क्षेत्र में भी उन्होंने कीर्तिमान कायम किये हैं। राष्ट्रीय से लेकर वैश्विक स्तर तक उनके 500 से अधिक लेख, आलेख, ललित लेख, समीक्षा लेख और शोधालेख ससम्मान प्रकाशित हुये हैं। 10 पुस्तकें भी अभी तक प्रकाशित हैं। विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में पाठ्यपुस्तकों , सहायक पुस्तकों और सन्दर्भग्रन्थों के रूप में निर्धारित हैं। सिद्धार्थचरित का सांस्कृतिक अध्ययन, धर्मऔर राजनीति ,संस्कृति के चार सोपान,संस्कृत सुरभि, मित्रलाभ,प्रेरणा प्रदीप,साहित्य और समाज, गागर मे सागर एवं सटीक शुकनासोपदेश आदि नई दिल्ली और रायपुर से प्रकाशित हैं। शा.दिग्विजय कालेज राजनांदगांव, शा.वि.या.ता.महाविद्यालय दुर्ग ,शा.पाटणकर कन्या महाविद्यालय दुर्ग एवं माँ जगदम्बे महाविद्यालय जुनवानी,भिलाई जैसे अनेकानेक संस्थानों को डा.शर्मा ने अपनी पुस्तकें निःशुल्क भेंट कीं।

देश-विदेश में बढ़ाया संस्कृत का मान

स्वदेश के अधिकांश शैक्षणिक-सांस्कृतिक-साहित्यिक संस्थानो के सफल भ्रमण के पश्चात् उन्होंने इसी प्रकार के शैक्षणिक संस्थानों की ओर रुख किया। आचार्य डा.महेशचन्द्र शर्मा ने मेलबर्न,लन्दन,आक्सफोर्ड, पेरिस, बान, फ्रेंकफर्ट,ड्यूज़लड्राफ़,ब्रूसेल्स,सिंगापुर,कोलम्बो और ढाका के सफल शैक्षिक-शोध भ्रमण किये। यू.जी.सी.नयी दिल्ली द्वारा उनके शिक्षा-अनुसन्धान के वैश्विक दौरे प्रायोजित किये गये। यद्यपि डा.शर्मा का चयन प्रशासनिक सेवाओं के लिए भी हुआ था,पर वे नहीं गये और उच्चशिक्षा को ही चुना। शिक्षकीय सेवा उनकी मजबूरी नहीं,ज़रूरी थी, उचित थी।

शिक्षा के क्षेत्र में किए कई नए व अनूठे प्रयोग

शिक्षक या आचार्य के रूप में ही नहीं,प्राचार्य के रूप में भी उन्होंने अपनी अमिट छाप छोड़ी। शिक्षा की गुणवत्ता,विषयों के तुलनात्मक अध्ययन और शोध के अलावा अनेकानेक नवाचार उन्होंने किये और साथियों कराने की कोशिशें कीं। विद्यार्थियों के मन से परीक्षा के भय के भूत को भगाने के लिये उन्होंने ‘गुडलक चाकलेट’ से परीक्षा के पहले दिन बच्चों का मुँह मीठा कराकर,उत्साहवर्धक शब्दों से मनोबल बढाने का शुभकार्य किया। मासिक, त्रैमासिक,छःमाही और वार्षिक परीक्षा के पहले दिन पहले पेपर के दिन स्टाफ के साथ की गयी इस रचनात्मक पहल की सबने सराहना की।

विद्यार्थियों के भविष्य की भी की चिंता

आर्थिक रूप से कमज़ोर विद्यार्थियों की फीस-पुस्तकों हेतु वे स्वयं सहायता कर अनेक समाजसेवियों को भी सत्प्रेरित करते रहे। पोषक शालाओं में जाकर मेधावी-निर्धन विद्यार्थियों की मदद कर कालेज आने की प्रेरणा देते रहे। महविद्यालय परिवार की आर्थिक सहायता हेतु ‘नेकी की दीवार’ बड़ी सहायक और लोकप्रिय सिद्ध हुई। विद्यार्थियों के रोज़गार मार्गदर्शन हेतु जाब प्लेसमेन्ट सेल भी बड़ा सहायक रहा। डा.शर्मा ने केवल उपदेश न देकर अच्छाईयों का खुद भी पालन किया। वे प्राचार्य रहते हुये भी स्वयं कक्षाएं लेते थे। रचनात्मक वातावरण बनाते थे। उनके समय में विद्यार्थियों ने मेरिट, खेल, एन.सी.सी.,रा.से.यो. साहित्यिक-सांस्कृतिक सभी क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्तर पर कालेज के झण्डे गाड़ दिये। नैक मूल्यांकन में अच्छी ग्रेड्स इसी कारण मिलती गयीं।

मिले कई महत्वपूर्ण सम्मान

इन्ही विशेषताओं के कारण और एक समर्पित आचार्य और प्राचार्य के रूप में डा.महेशचन्द्र शर्मा को अनेक सम्मान प्राप्त हुये। उन्हें अक्षर चेतना सम्मान, ज्ञानज्योति अलंकरण,राष्ट्रभाषा सम्मान,आउट स्टैण्डिंग यंग इण्डियन , सर्टिफिकेट आफ़ एप्रीसिएशन, सृजन शिक्षक सम्मान,सर्टिफिकेट आफ एचीवमेंट एवं आउट स्टैंडिंग प्रिंसिपल के रूप में नवाज़ा गया है। 26 जनवरी और 15 अगस्त को , राजभवन में आयोजित सम्मान समारोह में भी आचार्य डा. महेशचन्द्र शर्मा को प्रतिवर्ष विशेष रूप से आमन्त्रित किया जाता रहा है। उच्चशिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ शासन ने भी संस्कृत शिक्षा मे उनके विशेष योगदान को रेखांकित करते हुये डा. शर्मा को विशेष रूप से सम्मानित किया।

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