सारंगढ़ – बिक गया कोचिया के हाथो विभाग ,कोचिया का नाम सुनते ही बहाने करने लग जाते है साहब आखिर बहाने के क्या राज है क्यों उनके नाम से गाड़ी छोड़ देने की मनसा जाहिर होता है सूत्र की माने तो सारंगढ़ का सबसे बड़ा कोचिया सदीप अग्रवाल की गाडियां बिना सौदा पत्र व बिना अनुज्ञा पत्र के रात के अंधेरे में दिन के उजाले में भी बेहिचक दौड़ रहे है काली कमाई करने वाले काली रात का इंतजार करते है लेकिन इस धान कोचियो को रात की अंधेरे की जरुरत नहीं दिन के उजाले में ही अपने पिकअप से गाड़ी भर कर कोचियागीरी करने में लगे हुए है विगत दिनों पीछे एक सफेद कलर की पिकअप cg13 एसी 1721 मे लगभग 70 बोरी धान भरकर पचपेड़ी रोड से लेकर राइस मिल ले जा रहा था जिसकी जानकारी मंडी इस्पेक्टर को देने पर एक बार तो साहब आ रहे है बोले उसके बाद दूसरी बार फोन करके गाड़ी किनकी है ड्राइवर को पूछने को कहा जैसे ही कोचिया संदीप अग्रवाल का नाम सुना मंडी स्पेक्टर साहब गोल गोल घुमाने लगा गए और कहने लगे अभी बहुत बिजी हूं नहीं आ पाऊंगा महज सारंगढ़ से 5 से 7 किलोमीटर दूर साहब बैठे रह गए लेकिन नहीं पहुंचे अपनी जिम्मेदारियों से भागते नजर आए मंडी इस्पेक्टर लेकिन ऐसा करने का कारण क्या है जानकार हैरान हो जायेगे क्योंकि उनकी गाड़ी पकड़ने की हिम्मत नहीं विभाग को या फिर गांधी बाबा का खूब आशीर्वाद मिला है कि कोचिया का नाम सुनते ही टालने को मजबूर हो गए विभाग कोचिया प्रतिदिन सैकड़ों क्विंटल धान बिना कागजात के बेच कर लाखो कमा रहे है आखिर इनपे क्यों अब तक विभाग की नजर नहीं पड़ा ये सोचने वाली बात है