शाह के दौरे के बाद कर्नाटक में पहली बार चुनाव में होंगे त्रिकोणीय मुकाबले

बैंगलुरु । दक्षिण कर्नाटक क्षेत्र हमेशा कांग्रेस और जद (एस) का क्षेत्र रहा है। भाजपा ने इस क्षेत्र में अपनी पैठ बनाने के लिए कई दौरे किए। खास तौर पर गृह मंत्री अमित शाह के दौरे ने कर्नाटक के जनता पर एक अलग छाप छोड़ी है, जिसके बाद से इस क्षेत्र में पहली बार कांग्रेस, भाजपा और जद (एस) के बीच वर्चस्व के लिए त्रिकोणीय लड़ाई देखने को मिल रही है। भाजपा ने बैंगलुरु शहर में सबसे अधिक सीटें जीती थी। वहीं, हासन और मांड्या जैसे जिलों में, जहां जद-एस सभी सीटों पर जीत दर्ज करती थी, भाजपा एक-एक सीट जीतने में सफल रही है। दूसरी ओर, इस क्षेत्र में कांग्रेस भी उतनी ही मजबूत है।
दक्षिण कर्नाटक क्षेत्र में बेंगलुरु शहर के अलावा मैसूर, मांड्या, तुमकुरु, हासन, चामराजनगर, कोलार, बेंगलुरु ग्रामीण, कोलार, चिक्काबल्लापुरा और रामनगर जिले शामिल हैं। इस क्षेत्र में 86 विधानसभा सीटें हैं और अकेले बेंगलुरु शहर में 28 सीटें हैं। बेंगलुरु को छोड़कर, क्षेत्र के अन्य जिलों में, जद-एस ने 24 सीटें जीतीं, भाजपा 14 और कांग्रेस ने 20 सीटें जीतीं। जेडी-एस ने मांड्या की सभी सात सीटों पर जीत हासिल की थी। सूत्रों ने बताया कि बेंगलुरु ग्रामीण में चारों सीटों में से एक भी सीट न जीतने वाली बीजेपी इस बार चारों सीटों पर कब्जा जमाने की रणनीति बना रही है। पिछले चुनाव में कांग्रेस ने बैंगलुरु में 12 सीटों पर जीत हासिल की थी। ऑपरेशन लोटस के कारण बीजेपी ने 15 और जेडी-एस ने दो सीटें जीतीं, लेकिन एक सीट हार गई। इस बार कांग्रेस का लक्ष्य है कि वो 18 सीटों पर जीत हासिल करे और वहीं, बीजेपी अपनी सीटों की संख्या को 20 तक बढ़ाना चाहती है। जेडी-एस अकेले बैंगलुरु में छह से अधिक सीटों को लक्षित कर रहा है।

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