कृषि मंत्री बोले आंदोलन में किसान नही मोदी विरोधी लोग हैं शामिल

कृषि मंत्री बोले आंदोलन में किसान नही मोदी विरोधी लोग हैं शामिल

नई दिल्ली । केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर को विश्वास है कि जल्दी सरकार और किसान यूनियनों के बीच फिर से वार्ता होगी और समाधान निकलेगा। तोमर का मानना है कि किसानों के बीच कृत्रिम भय फैलाया जा रहा है जिसे दूर करने का सरकार पूरा प्रयास कर रही है। किसान आंदोलन के बीच चर्चा करते हुए तोमर ने सरकार और किसानों से आंदोलन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपनी बेबाक राय रखी। जवाब: जो ऐक्ट है उसका भाव अभी भी किसानों के हित के अनुरूप है। कुछ मुद्दे थे जिन पर किसानों को शंका थी। उसके निवारण का प्रयास किया है। सरकार का उद्देश्य किसानों को उपज का ज्यादा से ज्यादा मूल्य मिले इसके लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ाने का था। अभी मंडी में लाइसेंसी व्यापारी ही खरीदता था। अब सभी लोग खरीद कर सकते हैं। प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी तो किसानों का कोई ज्यादा लाभ भी मिलेगा किसानों के मन में कुछ शंका है तो उसका निवारण करना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन यह कृत्रिम डर है। कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग कई राज्यों में हो रही है लेकिन अभी तक किसी की जमीन नहीं गई है। जो कानून बनाए गए हैं वह किसानों को पर्याप्त सुरक्षा देते हैं। पंजाब-हरियाणा में मंडी व्यवस्था बहुत मजबूत और विकेंद्रित है। इससे उनको लगता है कि मंडी क्षेत्र प्रभावित होंगे, लेकिन बाकी देश भर में का किसान इन कानूनों का स्वागत कर रहा है। कई संगठन तो दिल्ली भी आना चाहते थे समर्थन में, लेकिन हमने उनको रोका है कि बातचीत के जरिए रास्ता निकल आएगा। 8 दिसंबर को भारत बंद में किसान कहां सड़क पर था? पंजाब भी पूरी तरह बंद नहीं था। कांग्रेस के छुटपुट कार्यकर्ता बंद का समर्थन करने निकले थे। दरअसल कांग्रेस दोमुंही राजनीति कर रही है। उसने इन कानूनों के बारे में अपने घोषणा पत्र में कहा था। संप्रग सरकार के समय भी प्रयास किए थे, लेकिन दबाव के कारण आगे नहीं बढ़ पाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी के दबाव में नहीं आते हैं जो किसान के हित में होगा वही फैसला करते हैं। इसीलिए मोदी ने इसे कर दिया। किसानों के साथ जल्दी ही दोबारा वार्ता शुरू होगी। सरकार तैयार हैं वे लोग भी बात कर रहे हैं। हम जल्दी ही समाधान तक पहुंचेंगे। जो वास्तविक किसान प्रतिनिधि आगे बढ़ कर फैसला लेंगे और यह गतिरोध समाप्त होगा। पहले किसान ही आए थे और किसान ही हैं मान कर बात कर रहे हैं। अभी वार्ता अंतिम दौर में नहीं पहुंची है। मुझे लगता है किसान यूनियन के लोग समझेंगे और जल्दी ही आंदोलन छोड़कर वार्ता के रास्ते पर आएंगे। अच्छा करने जाते हैं तो थोड़ी पीड़ा का दौर होता है। इतिहास वही बना पाते हैं जो इतिहास से आगे निकल जाते हैं। जो लकीर पर लकीर बनाते रहते हैं इतिहास नहीं बना पाते हैं। कोई परिवर्तन नहीं कर पाते हैं। यह माद्दा मोदी जी में हैं और वे कर रहे हैं। करना तो संप्रग सरकार भी चाहती थी लेकिन नहीं कर पाई।

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