नई दिल्ली. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari )ने केंद्र सरकार द्वारा पारित किए गए कृषि कानूनों (Farm Laws) का समर्थन करते हुए कहा है कि किसान आंदोलन (Kisan Andolan) अब राजनीतिक हो गया है. CNN-NEWS18 के पत्रकार ज़का जैकब से एक्सक्लूसिव बातचीत में गडकरी ने कहा कि नए कृषि कानून किसानों के पक्ष में हैं, लेकिन विपक्षी दल उन्हें गुमराह कर रहे हैं. किसानों से बातचीत के सवाल पर गडकरी ने कहा कि सरकार किसानों से बात करने को तैयार है.
केंद्रीय मंत्री ने किसानों से अपील की है कि वे कट्टर तत्वों से खुद को बचाए रखें. गडकरी ने कहा कि नए नियमों के तहत किसानों को कोई नुकसान नहीं है. यह पूछे जाने पर कि आखिर MSP पर सरकार कानून क्यों नहीं ला सकती है, इस पर नागपुर से लोकसभा सांसद गडकरी ने कहा कि जहां तक एमएसपी का सवाल है कैबिनेट हर साल उसके दाम तय करती है. राज्य सरकार के सहयोग से केंद्र सरकार किसानों के उत्पादों को खरीदने के लिए बाध्य है. ऐसे में कानून की कोई आवश्यकता नहीं है. उन्होंने कहा कि हमने 6 साल में 6 बार दाम बढ़ाए. राजनीति होती है पर किसानों के हित का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए.
चाहे जहां अपनी फसल बेचें किसान- गडकरी
किसानों के मुद्दे पर सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री गडकरी ने कहा कि लोग जब किसी चीज पर सहमत नहीं होते तो कन्फ्यूजन क्रिएट किया जाता है. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसानों को इन कानूनों को समझना चाहिए. हमारी सरकार किसानों के लिए समर्पित है और उनके द्वारा दिए गए सुझावों को स्वीकार करने के लिए तैयार है. हमारी सरकार में किसानों के साथ कोई अन्याय नहीं होगा. उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे तत्व हैं जो इस विरोध का दुरुपयोग करके किसानों को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं. ये गलत है. किसानों को तीन कानूनों को समझने की कोशिश करनी चाहिए.
भाजपा नेता ने कहा कि अगर कोई बातचीत नहीं होगी तो यह गलतफहमी पैदा कर सकता है.अगर बातचीत होती है तो मुद्दे हल हो जाएंगे, पूरी बात खत्म हो जाएगी, किसानों को न्याय मिलेगा, उन्हें राहत मिलेगी. हम किसानों के हित में काम कर रहे हैं. हमारी सरकार किसानों को समझाएगी और बातचीत के जरिए रास्ता निकालेगी. उन्होंने कहा कि अभी, कृषि और वाणिज्य मंत्री किसानों के साथ बातचीत में लगे हुए हैं. अगर मुझे उनसे बात करने के लिए कहा जाता है, तो मैं निश्चित रूप से उनसे बात करूंगा. उन्होंने कहा कि आज देश में 8 लाख करोड़ रुपये के कच्चे तेल का आयात हो रहा है, इसके बजाय, हम 2 लाख करोड़ रुपये की इथेनॉल अर्थव्यवस्था बनाना चाहते हैं. फिलहाल यह केवल 20,000 करोड़ रुपये है. अगर यह 2 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था बन जाएगा तो 1 लाख करोड़ रुपये किसानों की जेब में जाएंगे.