वायु प्रदूषण से गंभीर रोगों का खतरा बढ़ता जा रहा है। वायु प्रदूषण सीधे हमारी त्वचा को नुकसान पहुंचाने के साथ ही फेफडों और आंखों को भी बीमार कर रहा है। ‘वायु में मौजूद 2.5 माइक्रोन (पीएम 2.5) से छोटे कण सीधे सांस लेने के रास्ते हमारे शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। इससे हमें सांस लेने में दिक्कत, खांसी बुखार और यहां तक कि घुटन महसूस होने की समस्या भी हो सकती है। हमारा नर्वस सिस्टम भी प्रभावित हो जाता है और हमें सिरदर्द और चक्कर आ सकता है। अध्ययनों में बताया गया है कि हमारे दिल को भी प्रदूषण सीधे तौर पर नुकसानदेह होता है।
डॉक्टरों के अनुसार ‘पिछले कुछ दिनों में मरीजों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। यहां तक कि रोग की गंभीरता भी बढ़ गई है। ये रोगी खांसी, सांस लेने में दिक्कत, छींकने, बुखार और सांस की समस्या से पीड़ित हैं। सबसे आम बीमारी जो देखने को मिली हैं, वे हैं गंभीर ब्रोंकाइटिस, अपर रिस्परेटरी ट्रैक्ट का संक्रमण और अस्थमा की उत्तेजना।
प्रदूषण के घातक प्रभाव से कोई भी बचा नहीं है, लेकिन छोटे बच्चे और बुजुर्ग, आयु समूह सबसे ज्यादा पीड़ित है। ऐसे में पर्यावरण की मौजूद स्थितियों से निपटने के लिए हमें जरुरी सावधानी बरतनी चाहिए।
सांस के जरिये हानिकारक कणों को अंदर जाने से रोकने के लिए अपने चेहरे को कवर करें। स्वस्थ आहार खाएं, आवश्यक मात्रा में तरल पदार्थ लें। संक्रमण की स्थितियों को कम करने के लिए सभी कमजोर मरीजों को फ्लू और निमोनिया के टीके लगवाने चाहिए। इसके अलावा जब धुंध छायी हो तब सुबह के व्यायाम और घूमने से बचें क्योंकि व्यायाम के दौरान हम मौजूद प्रदूषित और हानिकारक हवा को सांस से अधिक मात्रा में खींचते हैं।